
प्रणय मिश्रा द्वारा
कोरबा :— थाना बांकी मोंगरा अंतर्गत सुरकछार भैरोताल एवं बलगी क्षेत्र में स्थित अहिरन नदी का सीना छलनी कर अवैध रेत उत्खनन खुलेआम किया जा रहा है। बलगी स्थित अहिरन नदी रेत घाट पर दिनदहाड़े और रात के अंधेरे में नियमों को ताक पर रखकर रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन जोरों पर फल-फूल रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टरों की कतारें नदी से रेत ढोती देखी जा रही हैं।
प्रदेश में लगभग 19 वर्षों बाद रेत खदानों के आवंटन की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। पहले खनिज विभाग द्वारा रेत खदानों का आवंटन केवल संबंधित पंचायतों को किया जाता था, लेकिन अब किसी भी व्यक्ति को रेत खदान संचालन का ठेका दिया जा सकता है। राज्य गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि पंचायतों से रेत खनन का अधिकार पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के बाद प्रदेशभर में रसूखदार लोगों द्वारा रेत घाटों के ठेके लेकर मनमाने ढंग से संचालन किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
ठेका मिलने के बाद से कई स्थानों पर ठेकेदार नियम-कायदों को दरकिनार कर अवैध उत्खनन और बिना पिट पास व रॉयल्टी के रेत परिवहन कर रहे हैं। बलगी के अहिरन नदी रेत घाट पर भी यही हालात हैं, जहां लॉकडाउन जैसे हालात में जब कई आवश्यक सेवाएं तक बंद रहीं, तब भी प्रशासन को चुनौती देते हुए रात-दिन अवैध रेत परिवहन जारी रहा।
बिना रॉयल्टी सैकड़ों ट्रैक्टरों का बेधड़क संचालन खनिज विभाग की भूमिका को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो खनिज विभाग की टीम जांच के लिए पहुंचती है और न ही यहां किसी प्रकार की रॉयल्टी व्यवस्था लागू की जाती है। ऐसे में किसी बड़े रसूखदार के संरक्षण में यह पूरा अवैध कारोबार चलने की आशंका भी जताई जा रही है।
ग्रामीण दहशत में, विरोध करने से मजबूर
ठेकेदारों की दबंगई के चलते ग्रामीण खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। विरोध करने पर डराने-धमकाने की बात सामने आ रही है। नदी को बुरी तरह नुकसान पहुंचाकर लगातार रेत उत्खनन किया जा रहा है, जिससे जीवनदायिनी अहिरन नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। पंचायतों के पास अब रेत खनन का अधिकार नहीं होने के कारण न पंचायत और न ही ग्रामीण इस ओर प्रभावी पहल कर पा रहे हैं।
रेत घाटों को लीज पर देने के बाद पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की बनती है, लेकिन मौजूदा हालात में कार्रवाई के अभाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि खनिज विभाग के अधिकारी जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाते हैं या फिर अवैध रेत उत्खनन पर वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई करते हैं।
