धान खरीदी की ऑनलाइन व्यवस्था बनी सिरदर्द, जैजैपुर में कई किसानों को नहीं मिल रहा टोकन

सक्ति :- छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले के जैजैपुर विधानसभा में भाजपा सरकार के कार्यकाल में किसानों को खेती के विभिन्न चरणों में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि इस बार खरीफ सीजन की शुरुआत से ही चुनौतियां शुरू हो गईं, जो अब धान बिक्री के समय तक जारी हैं।

खेती की शुरुआत में यूरिया और अन्य उर्वरकों की भारी कमी देखी गई। जैजैपुर क्षेत्र में किसानों को सरकारी दर पर खाद नहीं मिली, जिसके कारण कई किसानों को खुले बाजार से 370 रुपये की सरकारी दर वाली यूरिया की बोरी 1000 से 1200 रुपये में खरीदनी पड़ी। इस समस्या के विरोध में बाराद्वार से हसौद मुख्य मार्ग पर कचंदा मोड़, जैजैपुर में किसानों ने चक्का जाम किया, जिसके बाद कुछ राहत मिली।

इसके बाद गिरदावली (फसल सर्वे) के समय कई किसानों का रकबा कट गया। रकबा संशोधन के लिए किसानों को तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े, तब जाकर कुछ मामलों में सुधार हुआ।

वर्तमान में धान बिक्री के समय सबसे बड़ी समस्या टोकन नहीं कटने और वारिशान (बारिश से प्रभावित फसल) पंजीयन की है। राज्य में धान उपार्जन के लिए ऑनलाइन टोकन सिस्टम लागू है, लेकिन कई किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहा। साथ ही 15 दिसंबर के बाद वारिशान पंजीयन बंद होने से प्रभावित किसानों को परेशानी हो रही है। जैजैपुर तहसील में कम से कम 10 किसानों के वारिशान केस लंबित हैं। किसानों का कहना है कि यदि पंजीयन नहीं हुआ तो वे समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पाएंगे, जिससे बड़ा नुकसान होगा।

किसान संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इन समस्याओं का त्वरित समाधान करने की मांग की है। राज्य स्तर पर भी धान खरीदी में टोकन और पंजीयन संबंधी शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जैजैपुर जैसे क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है।

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