जिले के धान उपार्जन केंद्रों में किसान आसानी से बेच पा रहे हैं धान 24 घंटे ऑनलाइन ‘टोकन तुंहर हाथ’ व्यवस्था से धान बेचना हुआ आसान


बिलासपुर // जिले के धान उपार्जन केंद्र पहुँच रहे किसानों के चेहरों पर अब हड़बड़ी नहीं, बल्कि संतोष और भरोसे की मुस्कान दिखाई दे रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य जिले में सुव्यवस्थित रूप में जारी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के निर्देशानुसार जिले के सभी धान उपार्जन केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। टोकन तुंहर हाथ मोबाइल ऐप आधारित 24 घंटे ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों को काफी सुविधा हो रही है। किसानों ने धान खरीदी केंद्रों में समुचित इंतजामों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताया है।
धान खरीदी केंद्र सीपत पहुंचे किसानों ने राज्य सरकार की ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप आधारित 24 घंटे ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से धान खरीदी होने से सुविधा की बात कही है। अब किसान घर बैठे, किसी भी समय मोबाइल ऐप के माध्यम से टोकन प्राप्त कर रहे हैं और निर्धारित तिथि पर सीधे उपार्जन केंद्र पहुँचकर सहजता से अपना धान बेच पा रहे हैं। इससे न केवल किसानों का समय बच रहा है, बल्कि टोकन के लिए इधर-उधर भटकने और लंबी कतारों में खड़े रहने की मजबूरी भी खत्म हो गई है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली के चलते उपार्जन केंद्रों में पहले जैसी भीड़ नहीं दिखाई देती। सीपत उपार्जन केंद्र पहंुचे मस्तुरी ब्लॉक के ग्राम गुड़ी के किसान श्री पवन कुमार साहू ने बताया कि वे 43 एकड़ में खेती करते हैं और 146 क्विंटल धान बेचने समिति पहुँचे थे। उन्होंने बताया कि टोकन कटाने में किसी तरह की समस्या नहीं हुई। धान ज्यादा होने के कारण उन्होंने नियमानुसार तीन बार टोकन कटवाया। अब उनके सारे धान की बिक्री हो गई है I धान बेचने में किसी तरह की समस्या नहीं हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार जताया कि किसान हितैषी योजनाओं से छोटे-बड़े सभी किसान लाभान्वित हो रहे है।
उल्लेखनीय है कि जिले के सभी उपार्जन केंद्रों में धान की खरीदी नियमित रूप से की जा रही है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए समर्थन मूल्य की दर सूची उपार्जन केंद्रों में लगाई गई है। सुव्यवस्थित इंतजामों और सतत निगरानी के कारण किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य समय पर मिल रहा है। जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।

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