बांकीमोंगरा में दाने-दाने को मोहताज हितग्राही, कागजों में ‘पूरी’ पर हकीकत में ‘अधूरी’ राशन वितरण व्यवस्था


बांकीमोंगरा: केंद्र और राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा न रहे, लेकिन कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा क्षेत्र में सरकारी दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। यहाँ राशन कार्ड धारी हितग्राही अपने हक के अनाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

नियमों के मुताबिक, प्रत्येक राशन दुकान को हर महीने की 6-7 तारीख से लेकर महीने के अंत दिन तक खुला रहना चाहिए। लेकिन बांकीमोंगरा के कई क्षेत्रों में स्थिति इसके उलट है। राशन दुकानें अक्सर बंद पाई जाती हैं, जिससे काम-मजदूरी छोड़कर आए ग्रामीणों को खाली हाथ लौटना पड़ता है।

किस्तों में मिल रहा राशन
आज चावल, तो कल शक्कर’ हितग्राहियों की सबसे बड़ी समस्या राशन का एक साथ न मिलना है। ग्रामीणों का कहना है कि:
कभी सिर्फ चावल मिलता है, तो शक्कर और चना नदारद रहता है।
जब दुकानदार से सवाल किया जाता है, तो जवाब मिलता है— “ऊपर से (खाद्य विभाग) से माल नहीं आया है, अगले महीने आना।”
हैरानी की बात यह है कि दुकानों पर स्पष्ट लिखा होता है कि “इसी माह का राशन उठा लें, अगले माह नहीं मिलेगा।” ऐसे में जो राशन इस महीने नहीं मिला, वह अगले महीने ‘लैप्स’ हो जाता है, जिससे गरीबों को सीधे तौर पर नुकसान हो रहा है।

युवा कांग्रेस ने उठाए सवाल
इस अव्यवस्था पर जिला युवा कांग्रेस कोरबा ग्रामीण के जिलाध्यक्ष विकास सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा:
“सरकार और खाद्य विभाग को जमीनी स्तर पर इसकी समीक्षा करनी चाहिए। यदि किसी दुकान में भीड़ अधिक है या स्टॉक कम है, तो बचे हुए हितग्राहियों को अगले माह का राशन उठाने का मौका दिया जाना चाहिए। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर गरीब को उसका पूरा हक मिले।”

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
आखिर बांकीमोंगरा के इन राशन दुकानों पर खाद्य विभाग की नजर क्यों नहीं है, क्या संचालकों की मनमानी को अधिकारियों का मूक समर्थन प्राप्त है, जनता अब जवाब और अपना पूरा राशन चाहती है।

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