रायपुर // संगठन सृजन से जिला कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर क़ाबिज़ श्री नवीन जयसवाल ने जिला कार्यकारिणी के गठन में पार्टी के संविधान व नियमों की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तक को जवाब देते नहीं बन रहा ।यहाँ बात हो रही कबीरधाम जिला कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा एक दिन पूर्व घोषित जिला कार्यकारिणी की जिसमे जिला अध्यक्ष ने नियमों को बलाए ताक पर रखकर तथा प्रदेश कांग्रेस के आँख में धूल झोंककर अपने कार्यकारिणी की सूची अनुमोदित करा लिया !
कबीरधाम जिला कांग्रेस में आठ संगठन ब्लॉक है तथा दो विधानसभा है इस हिसाब से 61 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम में हुआ है जिसमे 12 उपाध्यक्ष ,18 महामंत्री,20 सचिव तथा 10 कार्यकारिणी सदस्य शामिल करते हुए सूची जारी की गई है ।इसमें सामाजिक समीकरण के हिसाब से चौदह कुर्मी,नौ अनुसूचित जाति छै अनुसूचित जनजाति पाँच साहू,तीन ब्राह्मण ,तीन यादव व तीन पटेल तथा दो मुस्लिम समाज को शामिल किया गया है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के उदयपुर चिंतन शिविर में पारित नवीन पार्टी संविधान के मुताबिक संगठन की इकाई में 30 प्रतिशत महिला तथा अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक समुदाय को प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य होगा लेकिन जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम के अध्यक्ष ने 61 सदस्यीय कार्यकारिणी में मात्र चार महिलाओं को ही जगह दी है जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के उपबंधित संविधान का खुला उलंघन है ।ऐसा नहीं है कि कबीरधाम जिले में कांग्रेस में सक्रिय व ऊर्जावान महिला नेत्रियों का अभाव है जबकि सभी कार्यक्रमों में बड़ी तादात में महिलाएं शामिल होती है बावजूद इसके जिलाध्यक्ष श्री नवीन जायसवाल ने जानबूझकर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को नज़रअंदाज़ किया ।अब प्रश्न ये उठता है कि जो अध्यक्ष ख़ुद ही पार्टी विधान का उल्लंघन कर रहा हो क्या ऐसे अध्यक्ष को पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार है ?क्या संविधान का उल्लंघन अनुशासनहीनता के दायरे में नहीं आता ? जबकि इसी फरवरी माह को दिल्ली में छत्तीसगढ़ के सभी नव नियुक्त जिलाध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री खड़गे जी तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि आप सभी अध्यक्षों के कार्यों की निगरानी उनके कार्यालय से लगातार किया जाएगा तथा सभी अध्यक्षों के कार्यों का हर छै माह में संवीक्षा किया जाएगा ।सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नियम विरुद्ध नियुक्ति की शिकायत पूरे सबूत के साथ श्री राहुल जी के कार्यालय में भेज दिया गया है ।
जिलाध्यक्ष श्री जायसवाल यही नहीं रुके उन्होंने जिले के मजबूत जनाधार ,सामाजिक छवि तथा सक्रिय कांग्रेस नेताओं की अनदेखी कर चापलुश व जी हुजूरी करने वाले नेताओं को ही कार्यकारिणी में शामिल किया है ताकि वे मनमर्ज़ी से पार्टी को हाँक सके तथा आवश्यकता पड़ने पर सौदे बाजी भी कर सके। जिले के नगरीय निकाय तथा पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शामिल करने के बजाय पार्षद व जनपद जिला पंचायत चुनाव हारने वालों को प्रमुखता से जगह दिया है। भौगोलिक व जातीय समीकरण का भी अनदेखा करने का आरोप जिले के कांग्रेस जनों ने लगाते हुये श्री जायसवाल को पद से हटाने की मांग किये हैं तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व छत्तीसगढ़ के प्रभारी श्री सचिन पायलट के रायपुर प्रवास के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित होकर श्री जायसवाल के कारगुजारियों को बतायेंगे।कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित व स्थायी आमंत्रित सदस्य के रूप में जिले के वरिष्ठ नेता,प्रदेश पदाधिकारी पूर्व विधायक ,पूर्व विधानसभा प्रत्याशी को शामिल करने का प्रावधान है,लेकिन अपनी मनमर्जी चलाने के चक्कर में उसका भी अनदेखा किया गया है!कार्यकारिणी के गठन में स्पष्ट तौर पर नियम बनाया गया है कि पचास फ़ीसद पचास वर्ष के नीचे तथा पचास प्रतिशत पचास से ऊपर उम्र वाले कांग्रेस जनों को शामिल किया जाना है लेकिन जिस तरह से पार्टी संविधान का उल्लंघन कर कार्यकारिणी का गठन कर मनमर्जी हाँकने का कोशिश किया गया है इस पर क्या कार्यवाही होती है इसका इंतज़ार कांग्रेसजनों को बेसब्री से रहेगा ।