दवा विक्रेताओं की हड़ताल में 1500 दुकानें रहीं बंद


बिलासपुर। प्रदेशव्यापी हड़ताल के कारण बुधवार को शहर सहित जिले के 1500 दवा दुकानें बंद रही। जिसमें मार्केट मेडिकल कॉम्प्लेक्स, सदर बाजार, गोल बाजार, बुधवारी और पुराना बस स्टैंड जैसे प्रमुख क्षेत्रों की दुकानें बंद रहीं। इस दौरान 5 करोड़ रुपए से अधिक का दवा कारोबार प्रभावित हुआ। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध और विभिन्न मांगों को लेकर एकदिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया था। इसी के तहत बिलासपुर में भी दुकानें बंद रखी गईं। औषधि विक्रेता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा ने दावा किया कि प्रदेश भर में 20 हजार से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं। हड़ताल के समर्थन में शहर के दवा विक्रेताओं ने दोपहर तेलीपारा स्थित मेडिकल कॉम्प्लेक्स से जुलूस निकाला। यह जुलूस बस स्टैंड, अग्रसेन चौक, तोरवा होते हुए कलेक्टोरेट पहुंचा। जिला औषधि विक्रेता संघ ने प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा, सचिव सच्चिदानंद तिर्थानी, कोषाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, संजय महोबे, जय साईं कृष्णा, महासचिव विशाल गोयल, सह सचिव हरपाल सिंह सलूजा और रिकी अजीत वर्मा शामिल थे। दवा दुकानों के बंद रहने से मरीजों को दवाओं के लिए भटकना पड़ा। हालांकि, प्रशासन ने सिम्स, जिला अस्पताल में रेड क्रॉस, शासकीय जेनेरिक दवा दुकानों और अपोलो फार्मेसी के माध्यम से दवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया। प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि आपात स्थिति में शिशु भवन को आवश्यक दवाएं उनके द्वारा सप्लाई की गईं। दवा विक्रेताओं ने रैली के दौरान ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने छोटे केमिस्टों के संरक्षण के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। औषधि विक्रेता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन दवा बिक्री की गलत नीति के कारण देश के लाखों केमिस्ट और दवा विक्रेताओं में असंतोष है। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट और छत्तीसगढ़ राज्य केमिस्ट एवं डिस्ट्रीब्यूटर संगठन के आह्वान पर बिलासपुर जिले के सभी केमिस्टों ने बाइक रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। दवा विक्रेताओं का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री से नशाखोरी और अवैध गर्भपात जैसी दवाओं का गलत इस्तेमाल होगा। बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की घर पहुंच सप्लाई से मरीजों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर असर पड़ेगा। वहीं देश भर के लाखों लाइसेंसधारी छोटे दवा दुकानदारों के अस्तित्व में संकट उत्पन्न हो जाएगा। संघ का कहना है कि देश भर में 12 लाख से अधिक दवा दुकानदार हैं और इनके द्वारा करीब एक करो? लोगों को रोजगार दिया गया है। ऑनलाइन दवा विक्रय के चलते इनके कारोबार, रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा।

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