किराए के नाम पर लेते थे जेसीबी और हाइवा, फिर कर देते थे सौदा


जांजगीर-चांपा। भारी वाहनों को किराए पर लेने के नाम पर मालिकों को झांसा देकर उन्हें दूसरे राज्यों में बेचने वाले एक अंतरराज्यीय ठग गिरोह का जांजगीर-चांपा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर दो जेसीबी, एक हाइवा, टाटा सफारी, महंगा मोबाइल और अन्य सामान जब्त किया है। बरामद संपत्ति की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का तरीका बेहद शातिराना था। आरोपी पहले वाहन मालिकों से संपर्क कर जेसीबी, ट्रेलर, ट्रैक्टर या अन्य भारी वाहनों को किराए पर लेने का सौदा करते थे। शुरुआत में मोटी रकम और अग्रिम भुगतान का लालच देकर विश्वास जीतते थे। वाहन हाथ लगते ही मोबाइल बंद कर देते और जीपीएस सिस्टम निकालकर वाहन को दूसरे जिले या राज्य में ले जाकर बेच देते थे।

मामले का खुलासा तब हुआ जब पिपरसत्ती निवासी प्रदीप कुमार कोसले की जेसीबी मशीन को किराए पर लेने के बाद आरोपी फरार हो गए। कई दिनों तक संपर्क नहीं होने और जीपीएस की अंतिम लोकेशन जबलपुर मिलने पर पीड़ित ने अकलतरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर सूचना के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह पिछले तीन वर्षों से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे रहा था। आरोपी किरायानामा और खरीद-बिक्री के फर्जी दस्तावेज तैयार कर वाहनों को अपने कब्जे में लेते थे और बाद में दूसरे लोगों को बेच देते थे। कई मामलों में वाहनों के नंबर तक बदल दिए जाते थे ताकि पहचान न हो सके। पुलिस ने इस मामले में तीरथराज कुर्रे, राहुल खांडे, सन्नीलाल पाटले, शिवम जायसवाल और भरत गुप्ता को गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना भरत गुप्ता चित्रकूट और जबलपुर क्षेत्र में सक्रिय था। पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की, जिसके बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए और चोरी-ठगी के वाहनों की बरामदगी संभव हो सकी। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने दो जेसीबी मशीन, एक हाइवा, ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा सफारी, सैमसंग गैलेक्सी एस-24 अल्ट्रा मोबाइल और घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की है। वहीं एक हाइवा वाहन जबलपुर स्थित यार्ड में फाइनेंस कंपनी द्वारा जब्त हालत में मिला। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाकर लंबे समय से फरार था। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है और मामले में आगे भी जांच जारी है। गिरोह के सदस्य पहले भारी वाहन मालिकों की तलाश करते थे, जिनकी जेसीबी, हाइवा, ट्रैक्टर या ट्रेलर खाली खड़े रहते थे। आरोपी खुद को ठेकेदार या वाहन संचालक बताकर संपर्क करते और मोटे किराए का लालच देते थे। अग्रिम भुगतान का भरोसा देकर वाहन अपने कब्जे में ले लेते थे। वाहन मिलते ही मोबाइल नंबर बंद कर देते और जीपीएस सिस्टम निकालकर वाहन को दूसरे राज्य पहुंचा देते थे। बाद में फर्जी दस्तावेजों के सहारे वाहन बेचकर रकम आपस में बांट लेते थे। पुलिस जांच में पता चला है कि इसी तरीके से गिरोह ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया। अकलतरा पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह पिछले तीन वर्षों से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सक्रिय था। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न जिलों में वाहन ठगी के मामले सामने आए हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान दो जेसीबी, एक हाइवा और ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा सफारी बरामद की है। गिरोह के कथित मास्टरमाइंड भरत गुप्ता को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में अभी भी जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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