
बिलासपुर। मानसून की शुरुआत में अब लगभग दो सप्ताह का समय शेष है, लेकिन शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर खामियां अब भी बरकरार हैं। शहर के कई वार्डों और बस्तियों में पेयजल पाइपलाइनें नालियों, गंदे पानी और जलभराव वाले क्षेत्रों से होकर गुजर रही हैं। बारिश शुरू होते ही इन पाइपलाइनों में दूषित पानी मिलने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे हजारों परिवारों के स्वास्थ्य पर संकट खड़ा हो सकता है। हर वर्ष बरसात के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों से नलों में गंदा, मटमैला और बदबूदार पानी आने की शिकायतें सामने आती हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने से नागरिकों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना हैं कि यदि किसी स्थान पर पाइपलाइन में लीकेज है और उसके आसपास नाली या गंदा पानी जमा है, तो दबाव कम होने की स्थिति में दूषित पानी पाइपलाइन के भीतर प्रवेश कर सकता है। ऐसी स्थिति में हैजा, पीलिया, डायरिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून से पहले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर पाइपलाइनों की तकनीकी जांच और मरम्मत जरूरी है, ताकि पेयजल आपूर्ति सुरक्षित बनी रहे। पेयजल व्यवस्था की चुनौतियों में अवैध नल कनेक्शन भी बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। नगर निगम के पुराने सर्वे के अनुसार शहर में 50 हजार से अधिक अवैध घरेलू नल कनेक्शन संचालित हैं। वहीं परिसीमन के बाद नगर निगम सीमा में शामिल नए क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में बिना अनुमति के कनेक्शन होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनधिकृत कनेक्शन न केवल राजस्व हानि का कारण बनते हैं, बल्कि पाइपलाइन नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव डालकर लीकेज और तकनीकी खराबियों की संभावना भी बढ़ाते हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि न तो अवैध कनेक्शनों की व्यापक जांच की जा रही है और न ही पेयजल पाइपलाइन नेटवर्क का नियमित निरीक्षण हो रहा है। कई स्थानों पर वर्षों पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हालत में हैं, लेकिन उनके सुधार की गति बेहद धीमी है। शहरवासियों ने मांग की है कि मानसून शुरू होने से पहले विशेष अभियान चलाकर नालियों और जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजर रही पाइपलाइनों की जांच कराई जाए, लीकेज को तत्काल सुधारा जाए तथा अवैध कनेक्शनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि नागरिकों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।