मम्मा ने नारी शक्ति को आत्मविश्वास, आध्यात्मिकता और नेतृत्व का नया आयाम दिया: मंजू दीदी


बिलासपुर। ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेंद्र में संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) की 61वीं पुण्यतिथि श्रद्धा एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक ज्ञान दिवस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने मम्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने मम्मा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे ज्ञान, योग और त्याग की साकार प्रतिमूर्ति थीं। उन्हें “चैतन्य सरस्वती” कहा जाता है क्योंकि वे ईश्वरीय ज्ञान की गूढ़ बातों को अत्यंत सरलता से स्पष्ट कर देती थीं। उनका जीवन श्रीमत के प्रति सम्पूर्ण समर्पण, अनुशासन, पवित्रता और सेवा का अनुपम उदाहरण था।

उन्होंने बताया कि मम्मा की सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे जो भी ज्ञान सुनाती थीं, पहले उसे अपने जीवन में धारण करती थीं। विपरीत परिस्थितियों, सामाजिक विरोध और गंभीर बीमारी के समय भी उनका आत्मबल कभी कम नहीं हुआ। कैंसर जैसी असाध्य बीमारी में भी वे सदैव हर्षितमुख, योगयुक्त और सेवाधारी बनी रहीं। उनके जीवन से हमें सिखने को मिलता है कि सच्चा योगी परिस्थितियों का नहीं, अपनी स्थिति का मालिक होता है।

दीदी ने कहा कि मम्मा ने नारी शक्ति को आत्मविश्वास, आध्यात्मिकता और नेतृत्व का नया आयाम दिया। उनका तप, त्याग और सेवा आज भी लाखों लोगों को श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा दे रहा है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित भाई-बहनों ने मम्मा के गुणों को जीवन में धारण कर समाज में शांति, प्रेम और संस्कारों का प्रसार करने का संकल्प लिया।

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