
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में बुधवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें दो बेटियों ने अपने पिता पर भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए अपनी पत्नी को झूठे एनडीपीएस प्रकरण में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने पुलिस को जब्त नशीली दवाओं की दोबारा जांच कराने तथा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल के निर्देश दिए हैं।
जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष डॉ. श्रीमती किरणमयी नायक ने की। प्रभारी सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया भी उपस्थित रहीं। प्रदेश स्तर की 411वीं एवं बिलासपुर जिले की 23वीं जनसुनवाई में कुल 47 मामलों की सुनवाई हुई। सबसे चर्चित प्रकरण में आवेदिकाओं ने बताया कि उनके पिता पिछले कई वर्षों से परिवार से अलग रह रहे हैं और मेडिकल व्यवसाय से जुड़े हैं। उनका आरोप था कि पिता ने पहले उनकी मां को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी और बाद में घर की छत पर बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं रखवाकर उन्हें एनडीपीएस प्रकरण में फंसा दिया। इसके कारण उनकी मां पिछले छह माह से जेल में हैं। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अनावेदक ने दूसरे के लाइसेंस पर मेडिकल स्टोर संचालित करने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि वर्ष 2022 में दुकान अपने भांजे के नाम बेच दी थी, लेकिन वर्तमान में वहीं नौकरी कर रहा है। दूसरी ओर आवेदिकाओं का कहना था कि मेडिकल स्टोर का संचालन अब भी उसी के नियंत्रण में है और उसने केवल भरण-पोषण देने से बचने के उद्देश्य से बिक्री का दस्तावेज तैयार किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिता ने दूसरी शादी कर ली है तथा परिवार पर तलाक का दबाव बनाने की कोशिश की।