अत्याधुनिक मशीनों के जरिए मजबूत हो रही रेल संरक्षा


बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने आधुनिक तकनीक आधारित ट्रैक मशीनों से रेल पथ अनुरक्षण कार्य को नई गति दी जा रही है। लगभग 5,500 ट्रैक किलोमीटर के विस्तृत रेल नेटवर्क पर प्रतिदिन 400 से अधिक यात्री एवं मालगाडिय़ों का सुरक्षित परिचालन करने के लिए ट्रैक की गुणवत्ता और संरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में रेलवे ने 2,042 किलोमीटर प्लेन ट्रैक टैंपिंग, 907 टर्नआउट टैंपिंग, 102 किलोमीटर डीप स्क्रीनिंग, 50 किलोमीटर ट्रैक रिन्यूअल और 58 टर्नआउट रिन्यूअल का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। रेलवे द्वारा उपलब्ध ब्लॉक समय का बेहतर उपयोग और योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्यों के परिणामस्वरूप ये उपलब्धियां हासिल हुई हैं। रेलवे में वर्तमान में 92 आधुनिक ट्रैक मशीनें रेल पथ अनुरक्षण के लिए कार्यरत हैं। इनमें सीएसएम, ड्योमैटिक, एमपीटी, यूनिमेट, बीसीएम, एफआरएम, पीक्यूआरएस, टी-28, बीआरएम, डीजीएस और यूटीवी जैसी अत्याधुनिक मशीनें शामिल हैं। इन मशीनों के संचालन और रखरखाव के लिए ट्रैक मशीन संगठन में करीब 900 प्रशिक्षित कर्मचारी लगातार कार्यरत हैं। विशेष रूप से नागपुर-झारसुगुड़ा रेलखंड पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से रेल संचालन को ध्यान में रखते हुए उच्च गुणवत्ता वाले ट्रैक अनुरक्षण की आवश्यकता और बढ़ गई है।

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