
बिलासपुर। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बिलासपुर ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और पारंपरिक कानूनों की सुरक्षा की मांग उठाई है। पार्टी की ओर से कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की गई कि यदि देश में समान नागरिक संहिता लागू होती है तो छत्तीसगढ़ समेत देश के आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि देश के विभिन्न आदिवासी समुदाय विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने और संपत्ति से जुड़े मामलों में लंबे समय से अपनी प्रथागत और रूढिग़त व्यवस्थाओं का पालन करते आ रहे हैं। इन समुदायों की सामाजिक परंपराएं और रीति-रिवाज अन्य समुदायों से अलग हैं। पार्टी ने तर्क दिया कि संविधान में प्रथाओं और रीति-रिवाजों को कानून का बल प्राप्त है। ऐसे में समान नागरिक संहिता लागू होने से आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान और पारंपरिक व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है। ज्ञापन में कहा गया कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि संरक्षण और स्वशासन से जुड़े विभिन्न कानून एवं संवैधानिक प्रावधान लागू हैं। इनमें पांचवीं और छठी अनुसूची, पेसा अधिनियम, वन अधिकार कानून सहित अलग-अलग राज्यों के भूमि संरक्षण संबंधी कानून शामिल हैं। पार्टी ने आशंका जताई कि समान नागरिक संहिता के कारण इन पारंपरिक व्यवस्थाओं और भूमि अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पार्टी के अनुसार विवाह और उत्तराधिकार संबंधी समान कानून लागू होने से मातृसत्तात्मक और पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्थाओं का संतुलन प्रभावित हो सकता है। पैतृक और सामुदायिक भूमि के बंटवारे को लेकर भी आदिवासी क्षेत्रों में नई समस्याएं पैदा होने की आशंका जताई गई है। ज्ञापन में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने तथा पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया को लागू करने की मांग की गई। इसके अलावा फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई और जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को सरल करने की मांग भी रखी गई। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने आदिवासी उपयोजना के लिए अलग बजट कानून बनाने, पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पेसा कानून और वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही आदिवासियों से जुड़े अन्य सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के समाधान के लिए भी सरकार से कार्रवाई का आग्रह किया गया। ज्ञापन में महंगाई पर नियंत्रण, किसानों को रियायती दर पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने, पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में राहत देने तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त आदिवासी अधिकारों को प्रभावी रूप से लागू करने जैसी मांगें भी शामिल हैं। पार्टी ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, प्रथागत कानूनों और विशेष संरक्षण से जुड़े प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।