सेंट्रल जेल में कैदी की मौत का जांच करने शहर पहुंची सीबीआई टीम


बिलासपुर। बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद कैदी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई की टीम जांच करने जेल पहुंची। चार सदस्यीय टीम ने सिविल लाइन थाने में रिकॉर्ड का जायजा लिया। केस डायरी के साथ मजिस्ट्रियल जांच के दस्तावेज भी लिए। इसके बाद टीम सेंट्रल जेल भी पहुंची। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई की विशेष टीम बिलासपुर पहुंची। एसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने सिविल लाइन थाने से केस डायरी समेत अन्य जरूरी रिकॉर्ड हासिल किए। इसके बाद टीम सेंट्रल जेल पहुंची, जहां जेल अधीक्षक और अन्य स्टाफ से पूछताछ कर घटना से जुड़ी जानकारी ली। सीबीआई टीम केस डायरी और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच करेगी। साथ ही वह घटना में पुलिस अधिकारियों की भूमिका और न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद की गई कार्रवाई की भी पड़ताल करेगी। सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम मोहरा निवासी श्रवण तांबे (35) खेती-किसानी करता था। पुलिस ने उसे 17 जनवरी 2024 को पकड़ा था। इसके बाद 18 जनवरी को पुलिस ने 6 लीटर महुआ शराब के साथ उसकी गिरफ्तारी का दावा किया। पुलिस ने उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज कर 19 जनवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अगले दिन 20 जनवरी को जब परिजन उससे मिलने जेल पहुंचे, तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया। 21 जनवरी को जेल में अचानक श्रवण की तबीयत बिगड़ गई। पहले जेल अस्पताल में उसका इलाज किया गया। इसके बाद हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां 22 जनवरी को उसकी मौत हो गई। जेल प्रबंधन ने दावा किया था कि श्रवण को सांस लेने में दिक्कत होने पर पहले जेल अस्पताल और फिर सिम्स भेजा गया था। सिम्स पहुंचने के बाद देर रात उसकी मौत हो गई। मामले की न्यायिक जांच प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट निकसन डेविड लकड़ा ने की थी। उन्होंने 22 जुलाई 2024 को जांच रिपोर्ट पेश किया। इसमें पोस्टमार्टम, एफएसएल, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर श्रवण की मौत का कारण सिर में लगी गंभीर चोट और उससे उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया था। न्यायिक जांच के दौरान मृतक के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए थे। मृतक श्रवण तांबे की पत्नी लहरा बाई और बेटी ने मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और हिरासत में मौत के लिए 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी। अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही पुलिसकर्मियों की लापरवाही को भी जिम्मेदार माना था। इसके बाद परिजनों ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। हालांकि, अंतिम मुआवजे की राशि बाद में तय की जाएगी। सीबीआई जांच शुरू होते ही पुलिस और जेल प्रबंधन में हडक़ंप मच गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *