गणेश-दुर्गा की प्रतिमाओं पर केमिकल रंग लगाने वालों पर होगी कार्रवाई


बिलासपुर। जिले में दुर्गोत्सव, गणेशोत्सव समेत कई त्योहार और उत्सवों के मौकों पर पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली मूर्तियों में पीओपी और रासायनिक रंगों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। इसका उल्लंघन करने पर मूर्तिकारों पर 5 हजार रुपए या इससे अधिक जुर्माना या वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। नगर निगम अपर आयुक्त खजांची कुम्हार ने शहर के मूर्तिकारों की बैठक बुलाकर स्पष्ट कर दिया कि, आस्था के साथ पर्यावरण की सुरक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है। आगामी गणेश उत्सव, दुर्गोत्सव और विश्वकर्मा जयंती पर गढ़ी जाने वाली प्रतिमाओं में पीओपी, रासायनिक रंगों की जगह पर्यावरण अनुकूल मिट्टी का इस्तेमाल करें। इस बैठक में उन्होंने सभी मूर्तिकारों को प्रतिमा निर्माण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। पर्यावरण संरक्षण मंडल और शासन की तरफ से निर्धारित गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन करने की अपील की है। अपर आयुक्त ने कहा कि मूर्तिकार समाज की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी कला के माध्यम से हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है कि प्रतिमा निर्माण की कला के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि प्रतिमा निर्माण में प्रतिबंधित प्लास्टिक, पीओपी और ऐसे किसी भी पदार्थ का इस्तेमाल न किया जाए, जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो। विशेष रूप से जल में विसर्जन के दौरान प्लास्टिक, पीओपी, रासायनिक रंग और अन्य गैर-जैव अपघटनीय सामग्री जल स्रोतों में पहुंचकर जल की गुणवत्ता प्रभावित कर सकती है। यह जलीय जीवों और वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। मिट्टी और जल प्रदूषण का कारण बन सकती है। लिहाजा प्रतिमा निर्माण में पर्यावरण अनुकूल सामग्री एवं प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाए और प्रतिमा पर्यावरणीय अनुकूल मिट्टी से बनाएं। बैठक में मूर्तिकारों से अपील की गई कि ऐसी प्रतिमाओं का निर्माण करें, जिनमें आस्था और कला के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिखाई दे। बैठक में शरद प्रजापति, राकेश प्रजापति, राकेश कौशिक, अमन प्रजापति तापस पाल, सुरेश कश्यप, शाहिद, सुजीत सूत्रधार, नीरज कौशिल क्रांति केंवट सहित बड़ी सख्या में मूर्तिकार उपस्थित रहे।

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