
बिलासपुर। नगर विधायक अमर अग्रवाल ने शनिवार को विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर विद्यार्थियों और नागरिकों से संवाद किया। दयालबंद स्थित स्वामी आत्मानंद महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। इसके बाद टिकरापारा स्थित गुजराती समाज भवन में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में भी उन्होंने सहभागिता की। एमएलबी कन्या शाला में छात्राओं के साथ संवाद करते हुए अमर अग्रवाल ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए माता-पिता और गुरुजनों का मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्राओं से लगातार सीखते रहने और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ अभियान के बाद समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। आज बालिकाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। सरकार की ओर से बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यालय की छात्र कैबिनेट को शपथ दिलाई और विद्यालय के संचालन एवं रखरखाव में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और नागरिकों ने नशामुक्ति का संकल्प भी लिया। इंस्पायर अवार्ड मानक प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित बिल्हा विकासखंड की दो छात्राओं रेणुका धनुआर और तृषा कमलेश को अमर अग्रवाल ने सम्मानित किया। शिक्षा विभाग की ओर से दोनों छात्राओं को पांच-पांच हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि और मोमेंटो प्रदान किया गया। देवरी खुर्द की रेणुका धनुआर ने ‘वॉल माउंट स्पिट डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम’ मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की स्थिति का पता लगाकर अलार्म के जरिए चेतावनी देने की अवधारणा पर आधारित है। इसी तरह बिजौर की तृषा कमलेश ने ‘वेदर गार्ड स्मार्ट बैग’ तैयार किया है। सेंसर आधारित इस बैग में बारिश या नमी का संकेत मिलने पर उससे जुड़ा छाता स्वत: खुल जाता है, जिससे किताबों और अन्य सामान को बारिश से बचाया जा सकता है। महारानी लक्ष्मीबाई कन्या शाला की छात्राओं को साइकिल वितरित करते हुए अग्रवाल ने कहा कि सरस्वती साइकिल वितरण योजना ने बालिकाओं के लिए स्कूल तक पहुंच आसान की है। इससे विद्यालयों में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि कक्षा नौवीं में अध्ययनरत बालिकाओं के लिए वर्ष 2004 से संचालित यह योजना दूरदराज से आने वाली छात्राओं के लिए उपयोगी साबित हुई है। बेटा और बेटी दोनों शिक्षित होंगे, तभी परिवार और समाज मजबूत होगा। उन्होंने शिक्षा को रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का आधार बताया।