
बिलासपुर। रतनपुर स्थित मां महामाया देवी मंदिर परिसर में रविवार को बजरंग दल व अन्य हिंदू सगंठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया। मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की। साथ ही मंदिर परिसर में दुकान संचालन की व्यवस्था में भेदभावपूर्ण रवैया नहीं अपनाने की मांग की। रतनपुर मंदिर परिसर में बीते 22 अगस्त को भाजपा नेताओं के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट द्वारा भागवत उर्फ राहुल पटेल, ईश्वर प्रधान, चिंकी प्रधान और राजू शर्मा को सात दिन के भीतर दुकानें हटाने का नोटिस जारी किए। रविवार को बजरंग दल सहित विभिन्न हिंदू संगठनों ने मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं और हिंदूवादी नेताओं ने ट्रस्ट कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए नोटिस वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हिंदू आस्था के प्रमुख केंद्र मां महामाया देवी मंदिर परिसर में गैर हिन्दू को दुकान संचालन की अनुमति दी गई, लेकिन विवाद के बाद कार्रवाई का निशाना हिंदू दुकानदारों को बनाया जा रहा है। इसे संगठनों ने भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताते हुए मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं को दुकान संचालन व अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देने की मांग की। हिंदू संगठनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि मंदिर का संचालन लंबे समय से एक ही परिवार के हाथों में है और ट्रस्ट के अध्यक्ष की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट प्रबंधन की नीतियों के कारण हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाओं की अनदेखी की जा रही है और गैर हिन्दू दुकानदारों को मंदिर परिसर में दुकान संचालन की अनुमति दी जा रही है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि मंदिर परिसर में सभी दुकानदारों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। यदि विवाद में किसी की भूमिका है तो जांच के बाद दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन किसी एक पक्ष के दुकानदारों को ही नोटिस देकर दुकानें हटाने का आदेश देना उचित नहीं है। इसी कार्रवाई को लेकर रविवार को हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने ट्रस्ट से चारों दुकानदारों को जारी नोटिस तत्काल वापस लेने तथा मंदिर परिसर में किसी भी गैर-हिंदू को दुकान संचालन या अन्य कार्य की अनुमति नहीं देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता ट्रस्ट कार्यालय के सामने जुटे रहे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की।