बिलासपुर। शिव-अनुराग भवन में जन्माष्टमी का पर्व इस बार धार्मिक उत्सव के साथ सामाजिक और आध्यात्मिक संदेशों के बीच मनाया गया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के आयोजन में बच्चों ने राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम में नशामुक्ति और बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने का संकल्प भी दिलाया गया। मुख्य वक्ता बीके गायत्री दीदी ने कहा कि जन्माष्टमी केवल श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि व्यक्ति के भीतर मौजूद नकारात्मक विचारों और अवगुणों को समाप्त कर श्रेष्ठ गुणों को अपनाने की प्रेरणा देने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के लिए व्यवहार में सरलता और वाणी में मधुरता जरूरी है। उन्होंने श्रीकृष्ण से जुड़े माखन और मिश्री के प्रतीकात्मक महत्व को समझाते हुए कहा कि मिश्री मधुर वाणी और मधुर व्यवहार का संदेश देती है, जबकि माखन कोमलता, सरलता और सहजता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने व्यवहार में इन गुणों को उतारना चाहिए। बीके गायत्री ने मोरपंख और बांसुरी के आध्यात्मिक संदेश को भी समझाया। उन्होंने कहा कि मोरपंख मन को हल्का रखने तथा बांसुरी अहंकार से मुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देती है। श्रीकृष्ण की 16 कलाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने सहयोग, साहस, करुणा, विनम्रता, क्षमा, अनुशासन, सत्यता और संतुष्टता जैसे गुणों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बच्चों ने राधा-कृष्ण की वेशभूषा में मनमोहक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। नन्हे कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना दिया। आयोजन के दौरान 10 करोड़ नशा मुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान के तहत उपस्थित लोगों ने नशामुक्त जीवन का संकल्प लिया। बच्चों को मोबाइल गेम से दूर रहने, मोबाइल के लिए माता-पिता से जिद नहीं करने और मोबाइल के सीमित उपयोग की प्रतिज्ञा भी दिलाई गई। अंत में माखन-मिश्री और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।