
बिलासपुर। जिले में जुलाई और अगस्त के दौरान स्वाइन फ्लू के 28 मरीज मिले हैं। वर्तमान में 11 मरीजों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। 7 मरीज अपोलो अस्पताल, 3 गनियारी और एक मरीज दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती हैं। मौसम में बदलाव के साथ वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसका असर सिम्स की ओपीडी पर भी दिखाई दे रहा है। सामान्य दिनों में करीब 2000 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या बढक़र 2500 के आसपास पहुंच गई है। इनमें 300 से अधिक मरीज वायरल फीवर से संबंधित लक्षणों के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की पहचान करने जांच जारी है। डॉक्टरों के अनुसार स्वाइन फ्लू और वायरल फीवर के शुरुआती लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई देते हैं। बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी जैसी शिकायतें दोनों में हो सकती हैं। इसलिए लक्षणों के आधार पर संदिग्ध मरीजों की जांच कराई जा रही है। स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के सैंपल जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लिए जा रहे हैं। इसके बाद सैंपल जांच के लिए सिम्स भेजे जाते हैं, जहां आरटी-पीसीआर जांच की सुविधा उपलब्ध है। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार करते हैं। गंभीर लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा जा रहा है। डॉक्टरों ने बुखार, खांसी या सर्दी होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी है। खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढंकने, नियमित रूप से हाथ साफ रखने और पर्याप्त पानी व तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई है। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं लेने को कहा गया है।