गोटीपुआ की थिरकन से सजी सांस्कृतिक संध्या


बिलासपुर। डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय में स्पिक मैके और विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग द्वारा संयुक्त रूप से ओडिशा के पारंपरिक गोटीपुआ नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति और वादन के माध्यम से भारतीय लोक एवं शास्त्रीय सांस्कृतिक परंपरा की समृद्ध विरासत को जीवंत किया। प्रस्तुति ने उपस्थित विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और विश्वविद्यालय परिवार को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में गोटीपुआ दल के आठ कलाकारों ने नृत्य तथा पांच कलाकारों ने वादन की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने अपनी आकर्षक वेशभूषा, भाव-भंगिमाओं, पद संचालन और नृत्य की विविध मुद्राओं के माध्यम से ओडिशा की सांस्कृतिक परंपरा और धार्मिक भावभूमि को प्रस्तुत किया। नृत्य के दौरान कलाकारों की भावाभिव्यक्ति और शारीरिक संतुलन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर स्पिक मैके के समन्वयक डॉ. अजय श्रीवास्तव, डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी, विश्वविद्यालय की सम कुलपति डॉ. जयति चटर्जी एवं विश्वजीत सरकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि ओडिशा का गोटीपुआ नृत्य वहां की सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यह नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ईश्वर की विभिन्न कृतियों, उनके स्वरूप और आध्यात्मिक भावों को अभिव्यक्त किया जाता है। कार्यक्रम का संचालन श्रुति प्रभला ने किया। आभार प्रदर्शन सृष्टि सिंह ठाकुर ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।नक्षत्र गुरुकुल ग्रुप द्वारा प्रस्तुति दी गई। इसमें कुणाल प्रधान, दिलीप पलाई, तन्मय मोहन्ता, आशीष कुमार मोहन्ता, अभिराम श्री, राज किशोर , ओमकार मोहन्ता, स्वयं प्रकाश मोहन्ता, और भुवनेश्वर ने नृत्य की प्रस्तुति दी। डायरेक्टर बिजय कुमार हैं। गोटीपुआ ओडिशा की प्राचीन पारंपरिक नृत्य शैली है। ‘गोटीपुआ’ का अर्थ सामान्यत: एकल बालक से जुड़ा माना जाता है। इस नृत्य में बाल कलाकार लड़कियों जैसी वेशभूषा और श्रृंगार धारण कर देवी-देवताओं तथा भगवान जगन्नाथ से जुड़े भावों और कथाओं को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। इसकी प्रमुख विशेषताओं में आकर्षक मुद्राएं, भाव-भंगिमाएं, लयबद्ध पद संचालन और शरीर को मोडक़र किए जाने वाले कठिन करतब शामिल हैं। गोटीपुआ को ओडिशा की नृत्य परंपरा और ओडिसी नृत्य के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। यह नृत्य ओडिशा की धार्मिक, सांस्कृतिक और लोक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

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