बिलासपुर। शहर के कुदुदंड स्थित चांदनी चौक में नवयुवक दुर्गा एवं दशहरा उत्सव समिति इस वर्ष 71वां दशहरा एवं दुर्गा पूजा उत्सव मना रही है। करीब 80 साल पुराने शिव मंदिर से जुड़ा यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा है। यहां दोनों समुदायों के लोग मिलकर उत्सव की तैयारियों से लेकर आयोजन की विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। समिति की नींव इतवारी रामचंद्र, रहस लाल श्रीवास्तव, सैयद सईद, भागवत केवट, बाबूलाल चंद्रवंशी, झुमुक लाल तिवारी और रमेश गहलोत सहित अन्य लोगों ने रखी थी। शुरुआती दौर में इतवारी रामचंद्र के नेतृत्व में प्रभात फेरी निकाली जाती थी। लोगों ने धान, चावल और सहयोग राशि एकत्र कर शिव मंदिर का निर्माण कराया। समय के साथ यह आयोजन धार्मिक और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन गया। समिति अध्यक्ष संदीप दुबे और अनिकेत कौशिक ने बताया कि सैयद सहीद के परिवार, जोहरा सहित चार-पांच मुस्लिम परिवार पीढय़िों से इस आयोजन में भाग लेते आ रहे हैं। सचिव मो. शहबाज, हितेश चंद्रा और सैय्यद जावेद ने बताया कि इस वर्ष पंडाल को बस्तर की पारंपरिक कला के आधार पर तैयार किया जा रहा है। यहां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना का यह पांचवां वर्ष है।
कन्या भोज की तैयारी में जुटे मुस्लिम परिवार : उत्सव की सबसे खास बात यह है कि मुस्लिम परिवार कन्या भोज के लिए भोजन तैयार करने सहित अन्य व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। समिति के सदस्य एक-दूसरे के साथ मिलकर आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। यह परंपरा सामाजिक सद्भाव और साझा संस्कृति का संदेश दे रही है।
सप्तमी पर धुनुची नृत्य, नवमी पर शिव-पार्वती विवाह संवाद : उत्सव के दौरान सप्तमी पर ढोल-धाक, गड़वा बाजा और धुनुची नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। नवमी पर शिव-पार्वती विवाह संवाद का आयोजन किया जाएगा। सखी सहेली मोहल्ला विकास समिति की ओर से महिलाओं और बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं। दशहरा के दिन रात 9.30 से 10 बजे के बीच 35 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, पहले यहां 55 से 60 फीट ऊंचे रावण का दहन होता था, लेकिन जगह की कमी के कारण अब इसका आकार छोटा कर दिया गया है। कुदुदंड का यह आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ वर्षों से चली आ रही एकता, सहयोग और भाईचारे की परंपरा को भी आगे बढ़ा रहा है।