
बिलासपुर। तीरंदाजी में लक्ष्य हासिल करने के लिए एकाग्रता, धैर्य और अनुशासन बेहद जरूरी हैं। इस खेल का जुड़ाव हमारी समृद्ध परंपरा और संस्कृति से भी रहा है। यह बात कलेक्टर संजय अग्रवाल ने डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय में आयोजित 26वीं राज्यस्तरीय सीनियर तीरंदाजी प्रतियोगिता में खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन करते हुए कही। प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे खिलाडिय़ों ने अपनी खेल प्रतिभा और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि भगवान राम, अर्जुन और एकलव्य के प्रसंगों में तीर-धनुष का विशेष महत्व रहा है। छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति में भी तीर-धनुष जीवनशैली और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने खिलाडिय़ों को निरंतर अभ्यास करने और खेल में बेहतर प्रदर्शन के लिए मेहनत व अनुशासन बनाए रखने की प्रेरणा दी। इस दौरान उन्होंने खिलाडय़िों को पुरस्कृत भी किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अरविंद तिवारी ने की। उन्होंने कहा कि तीरंदाजी धैर्य, एकाग्रता और अनुशासन का खेल है। विश्वविद्यालय खेल प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराकर उन्हें राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। प्रतियोगिता का आयोजन छत्तीसगढ़ आर्चरी एसोसिएशन, बिलासपुर आर्चरी एसोसिएशन तथा विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा, योग एवं खेल विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश में तीरंदाजी को प्रोत्साहित करना और प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर देना था। कार्यक्रम में सचिव कैलाश मुरारका, अधिवक्ता ईशा अग्रवाल और शिवतराई आर्चरी अकादमी की अध्यक्ष वंदना उईके विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। आयोजन संयोजक एवं विभाग के डीन डॉ. जय शंकर यादव रहे। जिला तीरंदाजी संघ के सचिव डॉ. आलोक शर्मा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ब्रह्मेश श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक, विद्यार्थी और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।