
तखतपुर। जनपद पंचायत तखतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत डोमनपुर में शमशान घाट तक जाने वाले एकमात्र मार्ग को बंद कर दिए जाने से ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए गांव से दूर अपनी निजी भूमि का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर शिकायत और स्टे आदेश के बावजूद रास्ता नहीं खुलने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। अब ग्राम पंचायत, पंच और ग्रामीण सड़क पर उतरकर चक्का जाम, धरना-प्रदर्शन और आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार शमशान घाट के सामने स्थित भोजराम चंद्राकर की निजी भूमि का उपयोग गांव के लोग पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से शमशान तक पहुंचने के लिए करते आ रहे थे। वर्ष 2013 में तत्कालीन सरपंच कामता जायसवाल ने भूमि स्वामी की सहमति से मनरेगा के तहत मिट्टी-मुरूम सड़क का निर्माण भी कराया था। विवाद तब बढ़ा जब वर्तमान पंचायत की ग्रामसभा में शमशान घाट की भूमि पर कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शमशान घाट की अधिकांश भूमि पर भोजराम चंद्राकर के द्वारा बेजा कब्जा कर खेती की जा रही है और केवल शवदाह स्थल ही बचा है। ग्रामसभा में अतिक्रमण हटाने का प्रस्ताव पारित होने के बाद विवाद बढ़ गया। ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की मांग के बाद नाराज होकर भोजराम चंद्राकर ने शमशान मार्ग पर पहले रोक लगाकर घेराबंदी कर दी। जब पंचायत द्वारा तहसील में शिकायत कर उक्त रोक और घेराबंदी पर रोक लगाने मांग किया तो तलसीलदार ने उक्त मामले में स्टे आदेश जारी कर दिया , लेकिन इसके बावजूद रास्ते पर पक्की दीवार खड़ी कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि स्टे ऑडर के बाद भी दीवार निर्माण की सूचना तहसीलदार और जूनापारा चौकी पुलिस को दी गई, लेकिन किसी ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण प्रशासन और पुलिस ने मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। 4 जून को ग्राम के पूर्व आदिवासी सरपंच विष्णु ध्रुव का आकस्मिक निधन हो गया। परिजनों ने शमशान घाट तक जाने के लिए रास्ता मांगा, लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर उन्हें गांव से दूर अपने खेत में अंतिम संस्कार करना पड़ा। इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही शमशान मार्ग को खोलने और विवाद का समाधान करने की दिशा में कार्रवाई नहीं हुई तो ग्राम पंचायत, पंच एवं ग्रामीण मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। चक्का जाम, धरना-प्रदर्शन और तहसील कार्यालय का घेराव भी आंदोलन की रणनीति में शामिल हो सकता है। गांव में इस मुद्दे को लेकर लगातार तनाव का माहौल बना हुआ है।