प्रभारी प्राचार्यों की मनमानी से अतिथि व्याख्याता हो रहे प्रताड़ित


शिवरीनारायण। शासन द्वारा छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक एवं प्रोफेसर के रिक्त पदों के विरुद्ध लंबे समय से अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति कर उन्हें उच्च शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। लेकिन इन अतिथि प्रध्यापकों को अपनी असुरक्षित भविष्य और व्यवस्था की विसंगतियों के लिए लंबे समय से जूझना भी पड़ रहा है। प्रदेश के अनेक महाविद्यालयों में नियुक्त प्रभारी प्राचार्यों की मनमानी, प्रशासनिक अकुशलता और उनकी तानाशाही रवैए से प्रदेश के शासकीय महाविघालयों के अनेक अतिथि व्याख्याताओं को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका एक उदाहरण 1857 की क्रांति के छत्तीसगढ़ के प्रथम अमर शहीद वीर नारायण सिंह की पावन जन्मभूमि सोनाखान में स्थित शासकीय नवीन महाविद्यालय की घटना है। जहां प्रभारी प्राचार्य के द्वारा अतिथि व्याख्याता नीति-2024 की कंडिका 8.3 का हवाला देकर महाविद्यालय के एक 61 वर्षीय अतिथि व्याख्याता को नोटिस पर नोटिस दिया जा रहा है। जबकि अतिथि व्याख्याता का कहना है कि वह ऐसा कोई कार्य ही नहीं किया है जिससे अतिथि व्याख्याता नीति के इस कंडिका से इनकी अतिथि व्याख्याता की सेवा समाप्त होगा। इन पर इस नीति का कंडिका 8.3 लागू नहीं हो रहा है फिर भी प्रभारी प्राचार्य द्वारा किसी तरह से इनकी अतिथि व्याख्याता आमंत्रण व्यवस्था समाप्त हो,इस उद्देश्य से उनके द्वारा यह लगातार प्रयास किया जा रहा है और उन्हें लगातार मानसिक-आर्थिक प्रताड़ना दिया जा रहा है।
प्रभारी प्राचार्य द्वारा पिछले साढ़े चार महीने से उनके मानदेय का भुगतान रोके जाने और आर्थिक-मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर इस 61 वर्षीय अतिथि व्याख्याता ने अपने हक अधिकार के लिए इन तपती गर्मी के दिनों में अमर शहीद वीर नारायण सिंह जी की पावन धरती पर आंदोलन करने का निर्णय लिया और इसके लिए उन्होंने 6 मई 2026 को प्रभारी प्राचार्य को पत्र लिखकर राष्ट्रपति सहित राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व अनेक उच्च अधिकारियों को इसकी प्रतिलिपि प्रेषित कर 20 मई 2026 तक प्रभारी प्राचार्य के द्वारा किए अनियमितताएं व भ्रष्टाचार की विभागीय जांच शुरू करने व इनके रोके मानदेय भुगतान नहीं किए जाने पर 21 मई से आंदोलन करने का एलान किया।

पीड़ित 61वर्षीय अतिथि व्याख्याता ने अपने हक-अधिकार के लिए वीर भूमि सोनाखान में आंदोलन की अनुमति हेतु उन्होंने तहसीलदार सोनाखान एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गिरौद को आवेदन-पत्र प्रस्तुत किए, लेकिन उन्हें आंदोलन की अनुमति नहीं दी गई।जबकि वह एकल और शांतिपूर्ण आंदोलन करना चाहते थे। लेकिन तहसीलदार सोनाखान ने इसकी अनुमति नहीं दी और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गिरौद ने आवेदन पत्र जमाकर अंदोलन की अनुमति देने या न देने की निर्णय की भी सूचना नहीं दी जैसा शासन का निर्देश है, का अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) गिरौद के द्वारा पालन नहीं किए जाने पर व्यथित इस अतिथि व्याख्याता ने अपने मानदेय भुगतान व प्रभारी प्राचार्य की विभागीय जांच तथा एसडीएम द्वारा अनुमति देने न देने जैसे मुद्दे का समाधान 10 जून तक करने हेतु एसडीएम गिरौद सहित उच्च अधिकारियों को पत्र प्रेषित कर आग्रह किया है। इसके बावजूद भी इन मामले का समाधान नहीं होने की स्थिति में वे न्यायालय की शरण में जाने के लिए विगत 25 मई 2026 को उच्च अधिकारियों को पत्र प्रेषित किया है। बता दे कि शासकीय नवीन महाविद्यालय सोनाखान के इस प्रभारी प्राचार्य के पदभार के पश्चात प्रत्येक शिक्षण-सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में निरंतर गिरावट आ रही है। वहीं यहां विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हेतु कोई कारगर उपाय भी नहीं किया जा रहा है। संपर्क के नाम पर पोषण स्कूलों में जा कर केवल औपचारिकताएं पुरी की जाती है।

छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों के प्रभारी प्राचार्यों द्वारा अतिथि व्याख्याताओं को प्रताड़ित किये जाने का यह कोई पहला मामला नही है। इसके पूर्व भी कुछ अन्य महाविघालयों में भी प्रभारी प्राचार्यो द्वारा अतिथि व्याख्याओं को आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर सेवा से मुक्त किए जाने का मामला प्रकाश में आया है । पुष्ट सूत्रों के अनुसार अप्रैल माह में शासकीय कन्या महाविद्यालय बेमेतरा की प्रभारी प्राचार्य ने एक महिला अतिथि व्याख्याता को अतिथि व्याख्याता नीति-2024 के नियमों को दरकिनार करते हुए बैक डेट में हटा दिया । इससे महिला अतिथि व्याख्याता क्षुब्ध होकर उच्च शिक्षा विभाग में शिकायत कर न्यायालय का रुख किया है। इसके पूर्व विवादों से घिरी इस महाविद्यालय की महिला प्रभारी प्राचार्य को शासन ने हटा दी है। एक हृदय विदारक घटना शासकीय दंतेश्वरी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय जगदलपुर की है। वहां के प्राचार्य ने एक अतिथि व्याख्याता को लगातार आर्थिक-मानसिक प्रताड़ना देकर उन्हें अतिथि व्याख्याता के पद से हटा दिया। जिससे प्रताड़ित अतिथि व्याख्याता ने अत्यंत निराश और विचलित होकर अपने मानसिक तनाव का सामना कर नहीं पाया और अंतत: उनकी मृत्यु हो गयी। एक अन्य घटना शासकीय लाहिड़ी स्नातकोत्तर महाविद्यालय चिरमिरी में की है। जहां की महिला प्रभारी प्राचार्य ने मिथ्या आरोप लगाकर एक महिला और एक पुरुष अतिथि व्याख्याताओं की सेवा समाप्त कर दी। इन दोनों अतिथि व्याख्याताओं ने अपने हक-अधिकार के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में न्याय की गुहार लगाई है।

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