कृषि में आत्मनिर्भरता और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना केंद्र सरकार की प्राथमिकता : तोखन साहू


बिलासपुर। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तथा बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद तोखन साहू ने बिलासपुर के राजकिशोर नगर स्थित हरसिंगार कॉलोनी में आयोजित “12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” अभियान अंतर्गत तीन दिवसीय पंजीकरण शिविर में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने तथा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

श्री साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता, गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण एवं युवा उत्थान के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से आत्मीय संवाद करते हुए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में जनभागीदारी की महत्ता पर बल दिया।

इसके उपरांत बीज प्रक्रिया केंद्र परिसर, धरमपुरा, जिला मुंगेली में आयोजित पीएम किसान दिवस एवं जैविक कृषि कार्यशाला कार्यक्रम में सम्मिलित होकर किसानों से आत्मीय संवाद किये।इस महत्वपूर्ण आयोजन में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, कृषि लागत में कमी लाने, मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित रखने तथा किसानों की आय में वृद्धि के विभिन्न उपायों पर सार्थक चर्चा हुई।

अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने तथा कृषि को आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि योजना के अंतर्गत अब तक 4.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।

श्री साहू ने कहा कि देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है, 22 करोड़ से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके हैं तथा फसल बीमा योजनाओं के माध्यम से किसानों को व्यापक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि ई-नाम (e-NAM) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार एवं आर्थिक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच समन्वय को कृषि विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं का ज्ञान और खेतों का अनुभव मिलकर कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से अनुसंधान एवं तकनीकी जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

प्राकृतिक एवं जैविक खेती की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री साहू ने कहा कि इससे खेती की लागत में कमी आती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है तथा किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए उचित मूल्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि जीवामृत, घनजीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक कृषि पद्धतियां किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

श्री साहू ने विश्वास व्यक्त किया कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन तथा केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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