
बिलासपुर। जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बैगा-बिरहोर समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का लाभ लगातार मिल रहा है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत शुरू की गई इस पहल से ऐसे ग्रामीणों को अपने गांव में ही जांच, चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयों की सुविधा मिल रही है, जिन्हें पहले इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बिलासपुर जिले को तीन मोबाइल मेडिकल यूनिट उपलब्ध कराई गई हैं। इन यूनिट्स के माध्यम से कोटा, तखतपुर और मस्तूरी विकासखंड के चिन्हांकित 54 बैगा-बिरहोर ग्रामों और बसाहटों में से 26 अत्यंत दुर्गम गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक तीनों मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से 648 स्वास्थ्य शिविर लगाए जा चुके हैं। इनमें 9,130 हितग्राहियों का पंजीयन हुआ, जबकि 13,626 चिकित्सकीय परामर्श दिए गए हैं। मोबाइल टीम में डॉक्टर, नर्स और लैब टेक्नीशियन शामिल हैं, जो निर्धारित गांवों में पहुंचकर मरीजों की जांच और उपचार कर रहे हैं। इन चलित अस्पतालों में करीब 25 प्रकार की पैथोलॉजी जांच और आवश्यक दवाइयां नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीबी, मलेरिया, कुष्ठ, कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं की पहचान के साथ उपचार की सुविधा भी दी जा रही है। इसके अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग भी की जा रही है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने में होने वाली परेशानी को देखते हुए मोबाइल मेडिकल यूनिट ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढऩे के साथ समय पर बीमारी की पहचान और उपचार में भी मदद मिल रही है। योजना के तहत गांव तक पहुंच रही चिकित्सा टीमों से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो रही है।