जनजातीय समाज की धारा ही मुख्य धारा है: इंदर भगत

बिलासपुर। वीरांगना रानी दुर्गावती जी 502वीं जन्म जयंती जनजाति गौरव समिति के तत्वाधान में बिलासपुर नगर में दिनांक 4.10.26 को कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। मंत्री का स्वागत पारंपरिक कर्मा नृत्य दल के रंगा रंग नृत्य से किया गया।अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के सरल स्वभाव का देश एवं संस्कृति विरोधी शक्तियां गलत फायदा उठाती है अत: जनजातीय समाज को जागृत होकर अपनी संस्कृति की रक्षा हेतु सजग रहना चाहिए। विशिष्ट अतिथि के रूप में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने आदिवासी वनवासी समाज के प्रकृति के प्रति और सभी प्राणियों के प्रति अगाध प्रेम को आज के भारतीय समाज को आत्मसात करना होगा जिससे कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना साकार हो। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंदर भगत, प्रदेशाध्यक्ष, जनजाति गौरव युवा समिति, छग ने अपने उद्बोधन प्राप्त में कहा कि जनजातीय समाज को अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करना चाहिए। भारत की अखंडता एवं सार्वभौमत्व पर जब जब आक्रमण हुआ तब तब जनजातीय समाज, प्रतिकार करने में सबसे आगे रहा है। इस समाज ने सदैव प्रकृति का संरक्षण करते हुए अपना जीवन यापन किया है। जनजाति समाज की धारा ही मुख्य धारा है जिस पर आज पूरा विश्व चलने को तत्पर है। मंच पर विभिन्न जनजातियों के प्रमुख जैसे डॉ. सी एस उइके, संरक्षक, गोंड समाज, बिलासपुर। पीएस पट्टा अध्यक्ष गोंड समाज प्रमुख, चैन सिंह विंध्यराज प्रमुख बिंझवार समाज बिलासपुर, वेदसिंह मरकाम सहायक संचालक ऑडिट विभाग मोहन सुंडी, हो मुंडा समाज प्रमुख यूरोप सिंह खैरवार खैरवार समाज प्रमुख अंजोरसिंह बैगाजी, बैगा समाज प्रमुख श्रीनारायण खुशरो जी ने मंच की शोभा और बढ़ गई। अंतराष्ट्रीय ओपन तीरंदाजी प्रतियोगिता जापान में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का एवं छत्तीसगढ़ राज्य का नाम रोशन करने वाली शिवतराई कोटा बिलासपुर निवासी बहन कु सुलोचना राज एवं बहन कु पायल मरावी का सम्मान भी किया गया। अध्यक्षीय संबोधन वेद सिंह मरकाम ने दिया, आभार प्रदर्शन जितेंद्र धु्रव ने किया। कायक्रम का संचालन धनेश्वर सिंह नेताम ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजीव धु्रव का विशेष योगदान रहा, साथ ही श्री देव सिंह पोर्ते,संबोध पैकरा, तुलेश्वर मरकाम, नारायण नेताम, देवेंद्र जगत, राहुल धु्रव, सत्या कँवर, विशम्भर नेताम, लेखराम धु्रव, रूपेंद्र वैष्णव आदि कार्यकर्ताओं का योगदान उल्लेखनीय रहा।

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