विधायक सुशांत शुक्ला को लड्ड्ओं से तौलकर किया स्वागत


बिलासपुर। मां महामाया के प्रति अटूट आस्था, सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के नेतृत्व में निकाली जा रही भव्य शारदीय नवरात्रि ध्वजा यात्रा के पांचवें दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सेमरताल से प्रारंभ हुई यात्रा का विभिन्न ग्रामों में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और श्रद्धालुओं ने आत्मीय स्वागत किया। कहीं पुष्पवर्षा हुई, कहीं माता की मनमोहक झांकी निकाली गई, तो कहीं पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ ध्वजा अर्पित कर मां महामाया के प्रति अपनी आस्था प्रकट की गई। पूरे मार्ग में माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
ध्वजा यात्रा का शुभारंभ सेमरताल से हुआ। सरपंच धनेत्तर सूर्यवंशी के नेतृत्व में महिलाओं व ग्रामीणों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ यात्रा का भव्य स्वागत किया। सेमरताल से आगे बढक़र ध्वजा यात्रा गतौरी पहुंची, जहां सरपंच नंदू मरकाम, दिनेश सिंह ठाकुर, राजा ठाकुर सहित ग्रामीणों ने यात्रा का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान जेसीबी के माध्यम से पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया गया। फूलों की वर्षा, माता के जयकारों और ग्रामीणों के उत्साह ने पूरे माहौल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। यात्रा के दौरान भदोरियाखार में पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के जैतखाम पर श्रद्धापूर्वक श्वेत ध्वजा (पालो) अर्पित की गई। यह पावन अवसर आस्था, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बना। ध्वजा यात्रा का रमतला पहुंचने पर विशेष उत्साह के साथ स्वागत किया गया। यहां युवाओं ने विधायक सुशांत शुक्ला को लड्डुओं से तौलकर आत्मीय अभिनंदन किया, जो आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा। युवाओं के इस अनूठे स्वागत ने यात्रा के प्रति उनके उत्साह और आत्मीयता को दर्शाया। इसी दौरान बच्चों व महिलाओं द्वारा माता रानी की विशेष झांकी भी निकाली गई। आकर्षक धार्मिक प्रस्तुति, श्रद्धालुओं की सहभागिता और माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। रमतला में उमड़ा उत्साह ध्वजा यात्रा के प्रति ग्रामीणों की गहरी आस्था और जनभागीदारी का प्रतीक बना। रमतला से आगे बढक़र यात्रा सेंदरी पहुंची। जहां माता सेंदुरा को श्रद्धापूर्वक ध्वजा अर्पित की गई। इसके साथ ही ग्राम में स्थित पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के जैतखाम पर श्वेत ध्वजा (पालो) अर्पित की गई। इन पावन धार्मिक आयोजनों के माध्यम से आस्था, परंपरा और सामाजिक सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचा।

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