
बिलासपुर। रावण के पुतले का दहन करने के साथ मनुष्य को अपने भीतर की बुराइयों को भी समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार जीवन की शांति छीन लेते हैं। इन पर विजय पाकर प्रेम, शांति और पवित्रता को अपनाना ही विजयादशमी का वास्तविक संदेश है। यह बात ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा सेवा केंद्र की प्रभारी मंजू दीदी ने राजकिशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में आयोजित नवरात्रि महोत्सव के समापन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि क्रोध का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार और सामाजिक वातावरण को प्रभावित करता है। इसलिए विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और शांति बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी बुरी आदतों को छोडऩे और श्रेष्ठ संस्कार अपनाने का संकल्प लेने की अपील की। नवरात्रि के दौरान शिव-अनुराग भवन में सजाई गई चैतन्य देवियों की झांकी का दशहरे पर समापन हुआ। देवियों के स्वरूप में सजी बालिकाओं और ब्रह्माकुमारी बहनों की शांत एवं एकाग्र मुद्रा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। झांकी के माध्यम से आध्यात्मिकता, आत्मिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया गया। इस अवसर पर पतंजलि बिलासपुर के अध्यक्ष डॉ. कुश श्रीवास्तव और लायंस डॉ. लव कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य श्रद्धालुओं को नशे और व्यसनों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही क्रोध पर नियंत्रण रखने, मोबाइल का सदुपयोग करने और परिवार में अच्छे संस्कार विकसित करने पर जोर दिया गया। मन की शांति, एकाग्रता और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए 22 से 28 अक्टूबर तक सात दिवसीय नि:शुल्क राजयोग मेडिटेशन शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर शिव-अनुराग भवन, राजकिशोर नगर और प्रभु दर्शन भवन, टिकरापारा में प्रतिदिन सुबह और शाम 7 से 8.15 बजे तक चलेगा। आयोजन के माध्यम से लोगों को नियमित राजयोग अभ्यास अपनाकर जीवन में शांति और सकारात्मकता लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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