बिलासपुर। क्रोध से कार्य सिद्ध नहीं होते, बल्कि प्यार, नम्रता और साइलेंस की शक्ति से कठिन कार्य भी सहज हो जाते हैं। इसलिए हर परिस्थिति में स्वयं को शांत रखते हुए दूसरों के प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। यह बातें टिकरापारा स्थित प्रभु दर्शन भवन में विशेष क्लास के दौरान ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कही। उन्होंने ईश्वरीय मुरली की व्याख्या करते हुए कहा कि जैसे परमात्मा प्यार के सागर हैं, वैसे ही हमें भी मास्टर प्यार का सागर बनना है। चिल्लाने, जोर से बोलने या आंखें दिखाने के बजाय शांति और नम्रता से दी गई सीख ही दूसरों के हृदय में परिवर्तन ला सकती है। शुरुआत में सभी के अंदर प्यार के संस्कार लाने में मेहनत लग सकती है लेकिन फिर सुचारु रूप से कार्यव्यवस्था चलने लगेगी। ज्ञान मार्ग में साइलेंस सबसे बड़ी शक्ति है। इसके लिए कर्म और परमात्मा की याद के बीच संतुलन जरूरी है। उन्होंने सभी को संकल्प कराया कि दिन की शुरुआत इस विचार से करें कि आज मन, वचन और कर्म से किसी भी आत्मा के साथ गलत कर्मों का हिसाब-किताब नहीं बनाएंगे। त्रिकालदर्शी अर्थात् भूत, भविष्य व वर्तमान की स्थिति को सोचकर कर्म करने से आत्मा माया के प्रभाव से सुरक्षित रहती है और अतींद्रिय सुख का अनुभव करती है।