महिला बाल विकास परियोजना में भ्रष्टाचार शिकायत की जांच पर उठे सवाल, पक्षपात के आरोप


बेलगहना से हनुमान अग्रवाल द्वारा खास खबर

बेलगहना :— महिला बाल विकास परियोजना कोटा के बेलगहना सेक्टर में सुपरवाइजर कीर्ति किरण नोगरे और उनकी सहायक ललिता यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, पैसे के लेनदेन और दुर्व्यवहार से जुड़ी शिकायतों की जांच अब खुद संदेह के घेरे में आ गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा एसडीएम कोटा, परियोजना अधिकारी सुरुचि श्याम और जिला कार्यक्रम अधिकारी बिलासपुर को दी गई शिकायत पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 17 अप्रैल को जांच दल बिना पूर्व सूचना बेलगहना पहुंचा और कार्यकर्ताओं को समझाने व दबाव बनाने का प्रयास किया। वहीं 21 अप्रैल को कोटा परियोजना कार्यालय में बयान के लिए बुलाए गए शिकायतकर्ताओं को भीषण गर्मी में घंटों बाहर खड़ा रखा गया, जबकि सुपरवाइजर के पक्ष में बयान देने वालों को अंदर बैठाकर विशेष सुविधा दी गई।
आरोप यह भी है कि आरोपी सहायक ललिता यादव, जो स्वयं मामले में संलिप्त हैं, जांच के दौरान सुपरवाइजर के पक्ष में कार्यकर्ताओं के बयान लिखवाते और प्रभावित करते देखी गईं। जांच अधिकारियों द्वारा लिए गए बयानों की प्रति भी संबंधित कार्यकर्ताओं को उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें बार-बार एक ही सवाल पूछकर मानसिक रूप से परेशान किया गया, जबकि कुछ शिकायतकर्ताओं को बिना बयान लिए ही वापस भेज दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में परियोजना अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिन पर सुपरवाइजर को बचाने के प्रयास के आरोप लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस कथित भ्रष्टाचार मामले में अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है, जिससे पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
यदि निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो जनप्रतिनिधियों और प्रभावित कार्यकर्ताओं द्वारा आंदोलन और न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी दी गई है। अब सभी की नजरें विभागीय जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं।

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