
कोरबा। पाली में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान का असर बेजुबान पशु-पक्षियों पर पड़ा है। नौकोनिया तालाब के किनारे डेरा जमाए 150 से ज्यादा प्रवासी चमगादड़ों की हीट स्ट्रोक से मौत हो गई है। चमगादड़ मरकर पेड़ों के नीचे गिर रहे हैं।
बता दें कि फरवरी-मार्च में इस तालाब के किनारे स्थित ऊंचे पेड़ों पर हजारों प्रवासी चमगादड़ आकर बसेरा बनाते हैं। इस वर्ष इनकी संख्या सामान्य से अधिक थी। पिछले कुछ दिनों से जारी 43 डिग्री के टॉर्चर को ये सहन नहीं कर पा रहे हैं। आसपास के गांव में भी यही हाल है। गर्मी का असर केवल पक्षियों पर ही नहीं, बल्कि खेती-किसानी पर भी पड़ा है। सब्जियां खेतों में ही झुलस रही हैं। इस बीच, प्रदेशभर के अस्पतालों में भीषण गर्मी और लू के कारण डिहाइड्रेशन 1200 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। राज्य महामारी नियंत्रण केंद्र ने अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। प्रदेश के सबसे ब?े अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डा. योगेंद्र मल्होत्रा के अनुसार हीट एग्जॉशन, हीट स्ट्रोक से ठीक पहले की स्थिति है। जब शरीर से पसीने के रूप में बहुत अधिक पानी और नमक निकल जाता है, तब यह समस्या होती है। चमगादड़ करीब 38 डिग्री तक का सामान्य शारीरिक तापमान बनाए रखते हैं। गर्मी के मौसम में 40 डिग्री से अधिक तापमान होने पर असहज हो जाते हैं। 42 डिग्री पार होते ही उनके लिए जानलेवा है। वे पेड़ों से गिरकर मरने लगते हैं। पाली में भी चमगादड़ों की मौत हीट स्ट्रोक से हुई है। पक्षियों की मौत पर नजर रखे हुए हैं।