बच्चों में व्यक्तित्व व संस्कार निर्माण का भी माध्यम है योग: गायत्री दीदी


बिलासपुर। ब्रह्माकुमारीज द्वारा शिव अनुराग भवन में चल रहे योग शिविर में मंगलवार को बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रतिदिन बढ़ती बच्चों की संख्या यह दर्शा रही है कि नई पीढ़ी का रुझान योग, प्राणायाम और स्वस्थ जीवनशैली की ओर बढ़ रहा है और यह आवश्यक भी है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी गायत्री दीदी ने कहा कि आज के डिजिटल युग में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए योग अत्यंत आवश्यक है। योग उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और संस्कारवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और संस्कार निर्माण का भी माध्यम है। नियमित योग एवं राजयोग मेडिटेशन बच्चों में अनुशासन, धैर्य, सकारात्मक सोच और आत्मबल का विकास करते हैं। शिविर में बच्चों को विभिन्न आसन व प्रणायामों का अभ्यास कराया गया। सेतु बंधासन का अभ्यास कराते हुए गायत्री दीदी ने बताया कि यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने, शरीर में लचीलापन बढ़ाने तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक है। इसके नियमित अभ्यास से बच्चों में आत्मविश्वास और संतुलन का विकास होता है। साथ ही बच्चों को एकाग्रता स्मरण शक्ति व मानसिक शान्ति देने के लिए अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, एवं गहरी श्वास के अभ्यास भी कराये । जिससे पढ़ाई में ध्यान बढ़ता है और तनाव कम होता है।

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