
बिलासपुर। आत्महत्या के प्रकरण को सर्पदंश की रिपोर्ट तैयार कर शासन से मुआवजा जारी कराया गया। इस तरह से जिले में 15 प्रकरण में फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने एसडीएम कार्यालय के दो बाबू व तहसील कार्यालय के क्लर्क को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य ने बताया कि मामले की जांच में पता चला कि एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। पुलिस ने उस समय मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया था। बाद में उसी मर्ग नंबर का दुरुपयोग करते हुए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई और मौत का कारण सर्पदंश दर्शाकर मुआवजा प्राप्त कर लिया गया। इस फर्जीवाड़े में एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसील कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर की भूमिका सामने आने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। फर्जी प्रकरण तैयार कर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की और शासन से मिलने वाली चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कराई। तोरवा पुलिस की जांच में महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की मौत के मामले में पुलिस ने नागपुर निवासी तत्कालीन सिम्स डॉक्टर डॉ. प्रियंका सोनी और उनके पति निहित सविता मोहन ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया में भूमिका निभाते हुए फर्जी रिपोर्ट तैयार की। इस मामले में डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जिले बहुचर्चित सर्पदंश प्रकरण में राजस्व विभाग के तीन लिपिकों की गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर और एसएसपी को ज्ञापन सौंपते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की।