
बिलासपुर। भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर 17 अगस्त को छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। संगठन से जुड़े असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, स्कीमी वर्करों, सार्वजनिक उपक्रमों और ठेका श्रमिकों ने रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सरगुजा से लेकर बस्तर संभाग तक विभिन्न जिलों में मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद बड़ी संख्या में श्रमिक आंदोलन में शामिल हुए। कई स्थानों पर आमसभा और रैली के जरिए श्रमिक संगठनों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। भारतीय मजदूर संघ ने न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार रुपए करने की मांग रखी है। इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन, न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपए करने और बोनस की सीमा बढ़ाने की मांग भी की गई है। संगठन ने स्कीमी वर्करों को सम्मानजनक मानदेय देने और सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा नए लेबर कोड में आवश्यक संशोधन किए जाने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाई गई। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री शंखध्वनि सिंह बनाफर ने बताया कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों सहित विभिन्न जिलों में हुए आंदोलन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मध्यान्ह भोजन कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और महिला श्रमिकों के साथ ठेका श्रमिकों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मांगों को लेकर संगठन लगातार आवाज उठा रहा है। सरकार ने मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदेश महामंत्री ने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 1 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में लाखों श्रमिकों की मौजूदगी में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने सरकार से श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों पर जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की है।