
बिलासपुर। आगामी धान खरीदी को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए बिलासपुर जिले में एग्रीस्टेक परियोजना के तहत खरीफ फसलों का डिजिटल क्रॉप सर्वे शुरू हो गया है। जिले के 708 गांवों में से 703 गांवों में मोबाइल एप के जरिए ऑनलाइन गिरदावरी की जा रही है, जबकि तकनीकी कारणों से 5 गांवों में सर्वे मैनुअल तरीके से कराया जाएगा। सर्वे का काम 17 अगस्त से शुरू होकर 30 सितंबर तक पूरा किया जाना है।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अधिकारियों को सर्वे में दर्ज होने वाले फसल संबंधी आंकड़ों की शुद्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल आगामी धान खरीदी में किया जाएगा, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत सर्वेयर खेतों में जाकर मोबाइल एप के माध्यम से खरीफ फसलों की ऑनलाइन गिरदावरी करेंगे। जहां तकनीकी कारणों से डिजिटल सर्वे संभव नहीं होगा, वहां मैनुअल प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सर्वे का सत्यापन राजस्व निरीक्षक और सुपरविजन पटवारी द्वारा किया जाएगा। यथासंभव किसानों का फोटो भी मौके पर लिया जाएगा, ताकि सर्वे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रमाणिक रहे। सर्वे में दर्ज जानकारी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मौके पर सत्यापन की व्यवस्था की गई है। पटवारी कुल सर्वे कार्य का 10 प्रतिशत, राजस्व निरीक्षक 5 प्रतिशत और तहसीलदार 2 प्रतिशत सर्वे का मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे। कलेक्टर ने अधिकारियों को इस प्रक्रिया का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए हैं। डिजिटल सर्वे के लिए स्थानीय प्रशिक्षित ग्रामीण युवाओं को सर्वेयर के रूप में जोड़ा गया है। सर्वेयर के लिए न्यूनतम 10वीं उत्तीर्ण होना, एंड्रॉयड वर्जन 9 या उससे अधिक वाला मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी जरूरी है। जिले में करीब 2097 सर्वेयर नियुक्त किए जा चुके हैं और उन्होंने सर्वे का काम शुरू कर दिया है। सर्वेयर द्वारा दर्ज जानकारी सही तरीके से अपलोड और स्वीकृत होने के बाद उसे प्रति खसरा 10 रुपए की दर से भुगतान किया जाएगा। सर्वे को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिले के सभी तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें मोबाइल एप के इस्तेमाल, सर्वे प्रक्रिया, सत्यापन और गुणवत्तापूर्ण कार्य से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। आगामी धान खरीदी में डिजिटल क्रॉप सर्वे के आंकड़ों का उपयोग किया जाना है। ऐसे में खेत, खसरा और फसल की वास्तविक जानकारी दर्ज होना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कलेक्टर ने सर्वेयरों और मैदानी अमले को खेतों में पहुंचकर वास्तविक फसल का सावधानीपूर्वक सर्वे करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को धान खरीदी के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और फसल संबंधी रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनी रहे।