
बिलासपुर। जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर शहर की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने विधायक अमर अग्रवाल और भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। पूर्व विधायक शैलेष पांडेय, शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने शहर की समस्याओं, विकास कार्यों और विधानसभा में बिलासपुर की आवाज उठाए जाने को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए। पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने विधानसभा के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि पिछले ढाई सालों में बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने विधानसभा में बिलासपुर की जनता से जुड़े एक भी सवाल नहीं उठाया। उन्होंने दावा किया कि रिकॉर्ड में विधायक के सवालों की संख्या शून्य है, जबकि उन्होंने अपने कार्यकाल में बिलासपुर की समस्याओं से जुड़े 392 सवाल विधानसभा में उठाए थे। शैलेष पांडेय ने कहा कि बिलासपुर आज जलभराव, खराब सड़कों, पेयजल संकट, बिजली, अपराध और नशाखोरी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में यदि विधायक विधानसभा में जनता की आवाज नहीं उठा पा रहे हैं और जनसमस्याओं का समाधान नहीं करा पा रहे हैं, तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए विधायक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और जनता के बीच जाकर नया जनादेश लेना चाहिए। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद करीब 23 वर्षों तक बिलासपुर का नेतृत्व अमर अग्रवाल के हाथों में रहा और वे लगभग 15 वर्षों तक मंत्री भी रहे। इसके बावजूद आज बिलासपुर जलभराव, बदहाल सड़कों, पेयजल संकट, बिजली कटौती, अपराध, नशाखोरी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, ट्रेनों के लगातार निरस्तीकरण, बिलासपुर से पर्याप्त हवाई सेवाओं का अभाव, बढ़ी बिजली दरों, निजी स्कूलों की मनमानी फीस और स्वामी आत्मानंद स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। केशरवानी ने बिगड़ती कानून-व्यवस्था और केंद्रीय विश्वविद्यालय के एलएलबी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं, बल्कि बिलासपुर के हक और जनता के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनता की समस्याओं की अनदेखी जारी रही तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक अपना संघर्ष और तेज करेगी।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भाजपा सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर करीब 1100 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन पहली ही तेज बारिश ने विकास के दावों की पोल खोल दी। शहर के कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया और लोगों के जरूरी दस्तावेज, बच्चों की मार्कशीट और घरेलू सामान बर्बाद हो गए। सिद्धांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रभावित लोगों को महज 6 हजार रुपये की सहायता देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, जबकि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक है। उन्होंने नुकसान का वास्तविक सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जलभराव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे और राहत सामग्री व भोजन वितरित किया, लेकिन संकट के समय स्थानीय विधायक जनता के बीच दिखाई नहीं दिए। सिद्धांशु मिश्रा ने स्मार्ट सिटी के तहत हुए विभिन्न कार्यों, जतिया तालाब समेत अन्य विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का काम केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के बीच खड़े होकर उनकी आवाज विधानसभा तक पहुंचाना है।