
बिलासपुर। साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने की अनूठी पहल के तहत बिलासा कला मंच ने 33वें शरद पूर्णिमा उत्सव का आयोजन किया। कार्यक्रम में अंचल के साहित्यकारों, कवियों और संगीतकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को सुरमय बना दिया। भजनों की मधुर स्वर लहरियों और कविताओं की भावपूर्ण प्रस्तुति के बीच श्रोताओं ने शरद पूर्णिमा की रात का आनंद लिया। चांदनी में रखी गई पारंपरिक खीर का प्रसाद भी वितरित किया गया। मंच के संरक्षक चंद्रप्रकाश देवरस, वरिष्ठ साहित्यकार सतीश जायसवाल और डॉ. अजय पाठक के आतिथ्य में आयोजित समारोह में संस्थापक डॉ. सोमनाथ यादव और अध्यक्ष महेश श्रीवास ने कहा कि मंच पिछले 33 वर्षों से प्रकृति और कला के जुड़ाव को उत्सव के रूप में मनाता आ रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ रश्मि गुप्ता, राजेंद्र सूर्यवंशी, मनोहर दास मानिकपुरी और ओम शंकर लिबर्टी की भजन प्रस्तुतियों से हुआ। इसके बाद शत्रुघ्न जैसवानी, डॉ. सोमनाथ मुखर्जी, डॉ. सुधाकर बिबे, सनत तिवारी, राकेश श्रीवास, दिनेश्वर जाधव और डॉ. जीडी पटेल ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं की सराहना बटोरी। उत्सव में महिलाओं के लिए हाऊजी खेल का आयोजन किया गया। वहीं, शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी गई पारंपरिक खीर का प्रसाद ग्रहण कर उपस्थित लोगों ने उत्सव की परंपरा निभाई। कार्यक्रम का संचालन मंच अध्यक्ष महेश श्रीवास ने किया, जबकि संयोजक रामेश्वर गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अरविंद शर्मा, अश्वनी पांडेय, अनूप श्रीवास, सुनील तिवारी, डॉ. नंद कुमार लास्कर, नरेंद्र कौशिक, बद्री केवट, उमेद्र यादव, जलेश्वर यादव, रामायण सूर्यवंशी, गोपाल यादव, शीतल पाटनवार, दिनेश लसहे और दिलीप कौशिक सहित अनेक साहित्यकार एवं कलाप्रेमी उपस्थित रहे।