
बिलासपुर। युवाओं को जीवन में सफलता हासिल करने के लिए दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी प्रतिभा और क्षमता पर भरोसा करना चाहिए। असफलता से घबराने के बजाय उसकी वजह समझकर गलतियों से सीखें और नए उत्साह के साथ प्रयास करें। शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी होना चाहिए। यह बात राज्यपाल रमेन डेका ने मंगलवार को पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में कही। समारोह में पिछले पांच वर्षों के 24 हजार 800 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा की उपाधियां प्रदान की गईं। राज्यपाल ने उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान है। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन में नई जिम्मेदारियों और अवसरों की शुरुआत है। राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल तकनीक और इंटरनेट ने ज्ञान तक पहुंच आसान बना दी है। युवाओं को इन सुविधाओं का विवेकपूर्ण उपयोग कर अपनी रचनात्मकता और विचारशक्ति विकसित करनी चाहिए। रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए अपनी रुचि और क्षमता पहचानना जरूरी है। अभिभावकों को भी बच्चों पर अपनी अपेक्षाएं थोपने के बजाय उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढऩे का अवसर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े प्रयासों की ही जरूरत नहीं है। अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना, पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना भी सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत है। युवाओं को डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से बचते हुए समय का सदुपयोग करना चाहिए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय उन लोगों के लिए शिक्षा का माध्यम बना है, जो नौकरी या अन्य परिस्थितियों के कारण नियमित पढ़ाई नहीं कर पाते। उन्होंने विश्वविद्यालय को नैक की ए प्लस ग्रेडिंग मिलने पर बधाई दी और विद्यार्थियों से अपने ज्ञान का उपयोग समाज के उत्थान में करने का आह्वान किया।